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Wednesday, 24 October 2012

पैसा नहीं आत्मीयता

सुनो भाई ,
कोई तो सुनो ,
मै भी पैसे वाला बनूंगा ,

और जब मै पैसे वाला ,
बहुत सारे पैसे वाला बन जाउंगा ,
तब भी, मुझे तुम ऐसे ही स्नेह दोगे ,
अरे , स्नेह के बदले पैसा दूंगा ,
तुम मेरी वाह वाह करना ,
उसके भी पैसे दूंगा ,
मै पैसे से सम्मान खरीदूंगा ,
मै पैसे के लिए कहीं तक भी गिर जाउंगा ,
पर तुम तो फिर भी मेरा सम्मान ही करोगे ,
आंखिर मै पैसे वाला हूँ ,
पैसे के बदले मुझे तुम अपनी आत्मीयता भी दोगे ,
मै जानता हूँ , अच्छी तरह जानता हूँ ,
मै तुम्हारी आत्मीयता नहीं खरीद पाउँगा ,
पैसा मुझे तुम्हारी आत्मीयता से दूर कर देगा ,
सोच रहा हूँ , मै ऐसे ही ठीक हूँ ,
मुझे पैसे से ज्यादा आपकी आत्मीयता प्रिय है ,
हाँ सोच लिया ,
मै पैसे वाला नहीं,
केवल तुम्हारा मित्र बने रहना चाहूँगा ,
तुम मेरे मित्र हो ,
इससे बड़ा धन और क्या होगा
विनोद भगत
"

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