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Friday, 17 February 2012

मजबूर


मजबूर है प्रधानमंत्री ,
लाचार है आम आदमी ,
भ्रष्टाचार कर रहा अट्टहास ,
भारत की यह कैसी हुई तकदीर ,
अन्ना, रामदेव को भी साना ,
भ्रष्टाचार के दलदल में ,
अब कौन करेगा आम आदमी का दुःख दूर ,
जो भी आएगा आगे ,उसे भी देख िलया जायेगा ,
हम तो कीचड़ है , पत्थर मारने की कोइश्श कर के देख लो ,
हमारे भ्रष्टाचार की बात भूल जाओ ,
अपने दामन के छीटे साफ़ करने की सोचो ,
करें क्या मेरे प्यारे देशवासियों हम तो मजबूर है ,
हम तो मजबूर हैं ,
                  विनोद भगत

1 comment:

  1. सच ही कहा है
    यह सरकार यही करती है
    जो बोले उसी का मुह पकडती है
    अब तो चुनाव आयोग औ -
    न्यायालय तक को जकड़ती है -
    ऐसे में -
    आम आदमी क्या कर सकता है
    क्रांति ही एक रास्ता जान पड़ता है
    -लक्ष्मण लडीवाला,जयपुर

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