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Saturday, 18 May 2013

अंतहीन तलाश

ठाकुर ,ब्राहमण ,दलित , यादव,

और भी ना जाने कौन ,
मेरे देश में सभी मिलते हैं ,
नहीं मिलता तो एक आदमी नहीं मिलता ,
मैं तलाश रहा हूँ एक आदमी ,
,गुजराती पंजाबी , मराठी , पहाड़ी .
यह सब भी मिलते हैं मेरे देश में ,
नहीं मिलता तो एक हिंदुस्तानी ,
मैं तलाश रहा हूँ एक हिंदुस्तानी ,
हिन्दू , मुस्लिम ईसाई और सिख भी ,
मेरे देश में मिलते हैं ,
मै ढूढ़ रहा हूँ एक इंसान ,
नेता ,अभिनेता , समाजसेवक भी ,
मेरे देश में आसानी से मिलते हैं ,
मैं ढूंढ़ रहा हूँ एक भला मानुष ,
मेरी तलाश जारी है अभी भी ,
शायद अंतहीन तलाश

विनोद भगत

समाजसेवक ,

नमस्कार , मै समाजसेवक ,
आपकी सेवा के लिए सदा तत्पर ,
कहिये , आपकी क्या समस्या है ,
अरे हाँ आराम से , मेरे चमचमाते मार्बल के फर्श से बचना ,
कहीं फिसल ना जाना ,
मेरे गले सोने की चेन देख रहे हो भाई ,
यह सब मेरी समाजसेवा का ही फल है ,
सच में समाजसेवा में बड़ा आनंद है ,
आप बताएं ,मै आपके लिए क्या कर सकता हूँ ,
वह बोला , समस्या मेरी आप शायद ही सुलझा पाओ ,
मै समाज सेवक , मुझको चुनौती दे रहे हो ,
तुम नहीं जानते बाहर खड़ी सफ़ेद रंग की महंगी गाडी ,
यह शानदार कोठी यह सब मैंने समाजसेवा से ही तो कमाया है ,
बड़े नेताओं और मंत्रियों तक मेरी पहुँच ,
सब समाजसेवा का ही तो प्रतिफल है ,
वह बोला , फिर भी तुम मेरी समस्या नहीं सुलझा सकते ,
आखिर कौन सी समस्या है , तुम्हारी ,
तुम जैसे समाजसेवक ही हमारी सबसे बड़ी समस्या है ,
नहीं , नासूर है , तुम अपने आप को समाजसेवक कहलाना बंद कर दो ,
समाज का कुछ भला होगा ,
बताओ ,सुलझा पाओगे क्या ,
कल तक तुम्हारी गिनती उठाईगीरों में होती थी ,
आज तुम समाज सेवक हो गए हो ,
दरअसल यही तो बड़ी समस्या है ,
दूर कर पाओगे ,
मै निरुत्तर था ,
वह कहे जा रहा था ,
समाजसेवक सुने जा रहा था ,

विनोद भगत

काला धन ,

भारत एक सांस्कृतिक देश है ,
नेताजी बोल रहे थे ,
पत्रकार बोले ,नेताजी काला धन ,
देश की सबसे बड़ी समस्या है ,
आप क्या कहेंगे इस बारे में ,
नेताजी आग बबूला हो गए ,
पत्रकारों पर आँखें तरेरी ,
गुस्से से बोले ,
आप इस पावन देश की संस्कृति को प्रदूषित कर रहे हैं ,
इस वैदिक और सांस्कृतिक देश में धन लक्ष्मी जी होती हैं ,
और आप लक्ष्मीजी को काला कह रहे हो ,
इसीलिए धन (लक्ष्मीजी ) हमारे पास है ,
आप धन कमाने को पाप कहते हो ,
कैसे अधर्मी हो ,
धर्म का पालन करो , धन की पूजा करो ,
धन के लिए कुछ भी करो ,
तभी लक्ष्मीजी प्रसन्न होंगी ,
आईंदा काला धन कभी मत कहना ,
धन तो धन है ,
हम तो धन की यानी लक्ष्मीजी की इज्ज़त करते हैं ,
तभी तो बेहतर ज़िन्दगी जीते हैं ,
विनोद भगत