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Thursday, 4 July 2013

छलावों की मृगतृष्णा

चूल्हे पर पानी भी पकाते है कुछ लोग
दरअसल रोज़ छले जाते हैं कुछ लोग ,
बेदर्दों की दुनिया से सीख ली है उन्होंने ,
बच्चों को भूखे ही सुलाते हैं कुछ लोग
छलावों की मृगतृष्णा नियति है जिनकी ,
अच्छे की आस में मर जाते है कुछ लोग
खाली पेट में इंसानियत नहीं पनपती ,
इसीलिए हैवान बन जाते हैं कुछ लोग ,
चूल्हे पर पानी भी पकाते है कुछ लोग
दरअसल रोज़ छले जाते हैं कुछ लोग ,

विनोद भगत

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