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Saturday, 13 July 2013

तस्वीर बदल जाये

सभी तो धार्मिक हैं यहाँ ,
या दावा करते हैं धार्मिक होने का ,
फिर भी पाप बढ़ रहा है ,
अत्याचार बढ़ रहा है ,
और मै ढूढ़ रहा हूँ धर्म ऐसा ,
जिसमें पाप और अत्याचार ,
अनाचार का समर्थन हो ,
लोग झूठ बोलते हैं ,
किसी भी धर्म में नहीं है ,
पाप अनाचार का समर्थन ,
या मुझे नहीं मिल पाया वह धर्म ,
नहीं पढ़ पाया उस धर्म के सिद्धांत ,
हर धर्म में नीति की ही बात है ,
पर कोई नहीं मानता नीति की बातें ,
पता नहीं धर्म की बातों के विपरीत ,
क्यों जाते हैं सब ,
किसी धर्म की किताब ऐसी भी होनी चाहिए ,
जिसमें अनीति की बातें हों ,
सबको वही पढनी चाहियॆ ,
किताब में पढ़ी बातों पर अमल कौन करता है ,
तब शायद तस्वीर बदल जाये

विनोद भगत

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