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Sunday, 21 July 2013

भक्ति का मार्ग

तुम मेरे पास श्रद्धा से आते ,
मैं श्रद्धा और भक्ति का भूखा हूँ ,
पर तुम तो अपना वैभव दिखाने आने लगे ,
तुम ही तो कहते हो , मैं सबको देता हूँ ,
मैं सर्वशक्तिमान हूँ , मुझमें समूचा जग समाया है ,
पर तुम तो मुझे ही दिखाने लगे अपनी तुच्छ शक्ति ,
धन धान्य मुझसे पाकर मुझे ही देने लगे ,
भूल गए मैंने तुम्हें इस योग्य बनाया ,
हाँ , मैंने बनाया इसलिए कोई दीन ना रहे ,
एक भी दीन जब तक है ,
मैं कैसे प्रसन्न रह सकता हूँ ,
बुद्धिमान कैसे कहूँ तुम्हें ,
तुम समझ नहीं पाए मुझे ,
नहीं जान पाए मेरा मंतव्य ,
मुझे प्रसन्न करने की झूठी कोशिश करते रहे ,
मैं संहारक भी हूँ ,
सृष्टि का सृजन भी मैंने ही किया है ,
पर , तुम समझ बैठे स्वयं को निर्माता ,
सच में तुम कितने मूर्ख बुद्धिमान हो ,
मुझे नहीं चाहिये तुम्हारा धन ,
मेरी बनाई सृष्टि के निर्माण से प्रेम करो ,
सच कहूँ यही है मेरी भक्ति का मार्ग ,
विनोद भगत

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