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Thursday, 6 June 2013

बस्तियों में

बस्तियों में क़ानून हो गया जंगल का,
जंगल की व्यवस्था अब बदलनी होगी,
फर्क कैसे हो बस्ती और जंगल के बीच,
एक बहस इस बात पर भी करनी होगी,
जानवर सा ही लगने लगा है आदमी,
सूरत जानवर की अब बदलनी होगी,
अफ़सोस क्यों अपने कर्मों का करें अब ,
गौरव की नहीं शर्म गाथाएँ लिखनी होगी
बस्तियों में क़ानून हो गया जंगल का,
जंगल की व्यवस्था अब बदलनी होगी,
विनोद भगत

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